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सीधा सा शहर
क्यों खामोश हो ........?
क्यों चुप चुप से हो ......?
मेरे शहर
बस इसलिए
कि तुम्हारा नाम
अखबारों की सुर्खियों में
नहीं आता
सच्चाई और सीधेपन की वजह से
तू अखबारों मे नहीं छप पाता
इसलिए दुखी हो ना
किन्तु
तुम्हें तो खुश होना चाहिए
तुम्हारे यहाँ
बलात्कार, चोरी, दंगा और कत्ल जैसे
संगीन अपराध नहीं होते
और तुम्हारा नाम अखबारों में
नहीं छप पाता
तुम्हें तो गर्व होना चाहिए
तू इन बुराइयों से
दूर ही रहा
अछूता ही रहा
तू अखबारों में न आया
न ही आना
अच्छा है
तू बना रहे अंजाना
अच्छा है
तू बना रहे अंजाना
-महेश मूलचंदानी
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शर्त
उस दिन
समाज से मिट जाएगी
नीच-ऊँच
जिस दिन
सीधी हो जाएगी
कुत्ते की पूँछ।
-महेश मूलचंदानी
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दोस्ती
खूब छन रही है
दोस्ती गहरी
कानून अंधा
सरकार बहरी।
-महेश मूलचंदानी
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